पवित्र प्यार का अनमोल बंधन रक्षाबंधन सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट रिश्ते की बुनियाद है। प्यार, विश्वास और रक्षा के संकल्प से बुना एक पवित्र बंधन। यह दिन महज़ राखी बांधने का नहीं, बल्कि उन अनगिनत यादों, हंसी-ठिठोली, नोकझोंक और अपनत्व के एहसास को फिर से जीने का है, जो बचपन से लेकर आज तक इस रिश्ते की नींव को मज़बूती देते हैं। इस दिन हर बहन की आंखों में भाई को देखने की चमक के साथ बचपन की तस्वीरें उभरने लगती हैं। वो चॉकलेट के लिए हुई मासूम लड़ाइयाँ, खिलौनों को लेकर नोंक-झोंक और फिर बिना कहे ही गलती माफ़ कर देने का अपना अलग अंदाज़। रक्षाबंधन उन बीते पलों को फिर से जीने का सबसे प्यारा जरिया बन जाता है। शादी के बाद चाहे बहन दूर चली जाए, लेकिन रक्षाबंधन की अनोखी सुबह उसे अपने मायके की दहलीज की तरफ खींच ही लाती है। वो दहलीज, जहां उसकी हंसी के साथ भाई की शरारतें और मां की ममता आज भी महकती हैं। एक बहन के लिए भाई का घर सिर्फ़ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि उसकी भावनाओं का मंदिर होता है। इस रिश्ते की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यह संपत्ति और भौतिकता से परे दिल की गहराइयों से जुड़ा...
सबका साथ, सबका विकास भाजपा सबका साथ, सबका विकास कर रही है। अब देखो, तय अवधि रोजगार की अधिसूचना चुपके से सभी सेक्टर में जारी और लागू कर दी। मौजूदा और आने वाली पीढ़ी को ठेकेदारी प्रथा में धकेलने का काम है। रखो या निकालो, कोई आवाज नहीं उठा सकता। इस तरह निजीकरण हर सेक्टर में फलेगा-फूलेगा। साथ ही आरक्षण की व्यवस्था भी समाप्त। इससे जो सवर्ण खुश हो सकते हैं, उनके लिए भी ये खबर है कि महाराज आपके बच्चे भी कोई पक्की नौकरी नहीं पाएंगे। जहां-तहां कभी चार महीने की तो कभी तीन महीने की नौकरी मिलेगी। कितने की मिलेगी, क्या सुविधा मिलेगी, ये पूछना भी मत। ऐसा इसलिए कि जिनकी पक्की नौकरी है वे ही पैदल हो रहे हैं। मार्च 18 की समाप्ति पर बरेली में बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर तक को प्रदर्शन में आना पड़ा क्योंकि योगी सरकार इस विभाग को निजी हाथों में सौंपने जा रही है। ये भी जान लीजिए कि इसका समर्थन किसने किया। जवाब है-भारतीय मजदूर संघ ने। ये विंग आरएसएस की है। 15 फरवरी को हुई मीटिंग में बीएमएस ने समर्थन दिया। श्रमिकों में भ्रम पैदा करने को अब इसका ख...
देश के साथ बड़ा मजाक सात साल पहले एक आदमी ने कहा था कि देश में 1.76 लाख करोड़ का घोटाला हुआ है। दूसरे आदमी ने यह घोटाला जनता को समझाने के लिए आंदोलन चलाया। उसके साथ तीसरी औरत और चैथा आदमी भी जुड़ा। पांचवें आदमी ने 2G घोटाले को उजागर करने के लिए एक और आंदोलन चलाया। छठा आदमी घोटाले को सुप्रीम कोर्ट लेकर गया। सातवें आदमी ने इन 6 लोगों के काम को कम्पाइल किया और जनता से वोट मांगा। सात साल बाद... सभी आरोपी बरी हो गए। यानी घोटाला हुआ ही नहीं था। अब पहले आदमी यानी विनोद राय पद्मभूषण पाकर BCCI बॉस हैं । दूसरे अन्ना हजारे Z+ लेकर चुप हैं। तीसरी किरन बेदी उप राज्यपाल हैं। चौथे अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। पांचवें बाबा रामदेव अरबों रुपये का टर्न ओवर करने वाले कामयाब बिजनेसमेन हैं। छठे सुब्रमन्यम स्वामी सांसद हैं। सातवें मोदी जी प्रधानमंत्री हैं। ...और आप बेवकूफ बन गए हैं, सही मायनों में इसी को मजाक कहते हैं।
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