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वोट खोलेगा आपकी तरक्की का रास्ता

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वोट खोलेगा आपकी तरक्की का रास्ता सियासी, मआशी और तालीमी मआमलात में दिलचस्पी जरूरी है। इसलिए चुनाव और मतदान हमारी जिंदगी का ही हिस्सा हैं। शरीफ लोगों की सियासत से दूरी अच्छी बात नहीं है। वोट से ही फिरकापरस्त ताकतों को शिकस्त दी जा सकती है… ------------- हिन्दुस्तान में मौकापरस्त नेताओं ने सियासत को एक घिनौनी चीज बना दिया है। चुनाव और मतदान को इतना रुसवा और बदनाम कर दिया है कि आम शरीफ लोग इससे नफरत तक करने लगे हैं। वोट के बारे में अच्छे लोगों की यह लापरवाही मुल्क और समाज के लिए बेहद नुकसानदेह है। इस उदासीनता से हिन्दुस्तानी समाज को भविष्य में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।    हर इंसान के लिए सियासी, मआशी और तालीमी मआमलात में दिलचस्पी जरूरी है। इस लिहाज से चुनाव और मतदान भी हमारी जिंदगी से अलग नहीं हैं। हकीकत यह भी है कि मौकापरस्तों के हाथों में पहुंचकर सियासत़ गंदगी का दलदल बन चुकी है। शायद यही वजह है कि शरीफ लोग इससे दूरी बनाने लगे हैं। इसको पाक-साफ करने का इकलौता रास्ता यही है कि समाज के बेहतर किरदार और बेहतर सोच रखने वाले लोग मैदाने सियासत में कदम रखें। ये लोग अपने...

मजहबी डिबेट पर पाबंदी जरूरी

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मजहबी डिबेट पर पाबंदी जरूरी न्यूज़ चैनलों पर मज़हबी डिबेट पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। मज़हबी बहस के लिए न्यूज़ चैनल के स्टूडियो मुनासिब जगह नहीं हैं। आए दिन यहां कुछ लोगों को बैठाकर इस्लामी शरीयत पर बहस होती है।     इसके बजाए शिक्षा, बेरोज़गारी, स्वास्थ जैसे मुद्दों पर बहस हो तो कुछ फायदा हो सकता है। कुछ फ़िरक़ापरस्त चैनल हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। महसूस यह भी होता है कि उनका एजेंडा इस्लामी शरीयत पर हमला कर नफरत फैलाना है। कुछ कठमुल्लों को बुलाकर इस्लाम और शरीयत के खिलाफ बहस कराते हैं। यह कठमुल्ले कुछ पार्टियों की चापलूसी करते नजर आते हैं। मुस्लिम समुदाय में एक से बढ़कर एक आलिम, स्कालर मौजूद हैं। ऐसे लोग टीवी डिबेट में होने वाली बदतमीज़ियों की वजह से वहां जाना पसंद नहीं करते हैं। इसलिए न्यूज़ चैनल गुमनाम और नीम मुल्लाओं को पकड़-पकड़कर लाते हैं।

देश के साथ बड़ा मजाक

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देश के साथ बड़ा मजाक सात साल पहले एक आदमी ने कहा था कि देश में 1.76 लाख करोड़ का घोटाला हुआ है। दूसरे आदमी ने यह घोटाला जनता को समझाने के लिए आंदोलन चलाया। उसके साथ तीसरी औरत और चैथा आदमी भी जुड़ा। पांचवें आदमी ने 2G घोटाले को उजागर करने के लिए एक और आंदोलन चलाया। छठा आदमी घोटाले को सुप्रीम कोर्ट लेकर गया। सातवें आदमी ने इन 6 लोगों के काम को कम्पाइल किया और जनता से वोट मांगा। सात साल बाद... सभी आरोपी बरी हो गए। यानी घोटाला हुआ ही नहीं था। अब पहले आदमी यानी विनोद राय पद्मभूषण पाकर BCCI बॉस हैं । दूसरे अन्ना हजारे Z+ लेकर चुप हैं। तीसरी किरन बेदी उप राज्यपाल हैं। चौथे अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। पांचवें बाबा रामदेव अरबों रुपये का टर्न ओवर करने वाले कामयाब बिजनेसमेन हैं। छठे सुब्रमन्यम स्वामी सांसद हैं। सातवें मोदी जी प्रधानमंत्री हैं।  ...और आप बेवकूफ बन गए हैं, सही मायनों में इसी को मजाक कहते हैं।

सबका साथ, सबका विकास

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सबका साथ, सबका विकास भाजपा सबका साथ, सबका विकास कर रही है। अब देखो, तय अवधि रोजगार की अधिसूचना चुपके से सभी सेक्टर में जारी और लागू कर दी। मौजूदा और आने वाली पीढ़ी को ठेकेदारी प्रथा में धकेलने का काम है। रखो या निकालो, कोई आवाज नहीं उठा सकता। इस तरह निजीकरण हर सेक्टर में फलेगा-फूलेगा। साथ ही आरक्षण की व्यवस्था भी समाप्त।     इससे जो सवर्ण खुश हो सकते हैं, उनके लिए भी ये खबर है कि महाराज आपके बच्चे भी कोई पक्की नौकरी नहीं पाएंगे। जहां-तहां कभी चार महीने की तो कभी तीन महीने की नौकरी मिलेगी। कितने की मिलेगी, क्या सुविधा मिलेगी, ये पूछना भी मत। ऐसा इसलिए कि जिनकी पक्की नौकरी है वे ही पैदल हो रहे हैं।    मार्च 18 की समाप्ति पर बरेली में बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर तक को प्रदर्शन में आना पड़ा क्योंकि योगी सरकार इस विभाग को निजी हाथों में सौंपने जा रही है। ये भी जान लीजिए कि इसका समर्थन किसने किया। जवाब है-भारतीय मजदूर संघ ने। ये विंग आरएसएस की है।     15 फरवरी को हुई मीटिंग में बीएमएस ने समर्थन दिया। श्रमिकों में भ्रम पैदा करने को अब इसका ख...

विकास: कल्पनाओं के संसार में

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विकास: कल्पनाओं के संसार में स्मार्ट सिटी : जैसे ही घर से बहार निकला सड़क अपने आप चल पड़ी, फिर मैंने जैसे ही चिंगम फेंकी डस्टबिन अपने आप आगे आ गया..पार्क में गाय डाईपर बाँध के घूम घूम रही थी। सबकुछ एक सपना सा लग रहा था अचानक सड़क धड़धड़ाने लगी देखा तो बापू ने लात मार के खाट पे से नीचे गिरा दिया! सांसद का गोद लिया गाँव : सड़क चलते चलते किसी गाँव में पहुँची तो क्या देखता हूँ रोबोट खेत जोत 5रहे थे किसान खेत के बीच में बने AC ऑफिस में बैठे कॉफ़ी की चुस्की लेते रोबोट को कंट्रोल कर रहे थे..सबके घर एयरकंडिशन महल बन चुके थे, सड़क के एक तरफ दूध का तालाब तो दूसरी तरफ मक्खन के टीले! 2 करोड़ जॉब्स/साल : आजकल मेरे जैसे कामचोर नौजवान छुपते घूम रहे हैं क्योंकि सरकार पकड़ पकड़ कर सरकारी नौकरियों पे भर्ती कर रही है..एक बार काला कम्बल मेरे पे डाल के ले गए और तहसीलदार भर्ती करने लगे, मुश्किल से जान बचा के भागा फिर सरकार ने बेरोजगार विदेशों से आयात करने शुरू किये। 1 सिर = 10 सिर : बेरोजगारों की तरह सुबह 11 बजे उठा नजर अख़बार पे पड़ी हैडिंग देखते ही सीना 112 इंच का हो गया मुझे अपनी आँखो...

नीरव मोदी! परेशान मत होना

नीरव मोदी! परेशान मत होना प्रिय नीरव मोदी! जहाँ हो खुश रहना, खूब तरक्की करना, और कर्जे की  चिंता मत करना, वो तो बैंक वाले हम लोगो से पच्चास-पच्चास, सौ-सौ रूपये करके वसूल ही लेंगे.. अभी  माल्या साहब का कर्जा चुका रहे है फिर तुम्हारा भी  चुका देंगे, हम  लोगो को तो आदत है इस सब की....कभी कभी तो लगता है कि हम लोग कमाते ही इसलिए है कि आप जैसे बडे बडे लोगों के बैंको का कर्ज भर सके, हम लोगों का जन्म भी  शायद इसलिये ही हुआ.. तुम बिल्कुल परेशान मत होना, तुम्हारे गबन का एक एक पैसा सूद के  साथ बैक को हम देशवासी  वापिस करके देशभक्त कहलाएगे ..          जय हिंद जय भारत

जातिवाद की जड़ें वाकई बहुत गहरी हैं

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जातिवाद की जड़ें वाकई बहुत गहरी हैं आशीष सक्सेना जातिवाद    की जड़ें वाकई बहुत गहरी हैं। हालांकि बदलाव भी है। गहराई नापने के लिए नगर निगम में नाला सफाई करने वालों का जायजा लिया गया। अब इस काम में गैर वाल्मीकि भी हैं, ओबीसी जातियों के भी हैं। वे भी वही काम करते हैं और वाल्मीकि भी, मतलब नाला सफाई। इसके बावजूद जब हाजिरी के लिए सब बैठे होते हैं और कोई वाल्मीकि अपने हाथ से उन्हें प्रसाद भी दे तो वे नहीं लेते, सुर्ती भी नहीं खाते उनके हाथ की।      बदलाव ये है कि दलित जातियों में जाटव, धोबी आदि अगर शिक्षित और नौकरपेशा हैं तो उन्हें थोड़ी जिद्दोजहद के बाद कमरा मिल जाएगा गैर दलित के बीच। पिछड़ी जातियों में यादव, कुर्मी, मौर्य काफी मुखर और सशक्त हो गए हैं लेकिन ब्राह्मणवादी सोच के लोगों को शीर्ष पदों पर नहीं सुहाते। हम तो एक उदाहरण ही देंगे फिलहाल।     केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार सात बार सांसद बन गए लेकिन उन्हें कभी कैबिनेट में नहीं लिया गया। इसकी क्या वजह हो सकती है, उनका चेहरा ज्यादा चिकना नहीं है या वे कुर्मी हैं इसलिए। प्रदेश में जो अग...

ज़िंदगी धर्म से नहीं, ऑक्सीज़न से चलती है

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ज़िंदगी धर्म से नहीं, ऑक्सीज़न से चलती है हिंदुस्तानियों खैर मनाओ कि गोरखपुर में मरने वाले 63 बच्चे गरीबों के थे। अगर गाय के होते तो अब तक देश (गौ) भक्त ईंट से ईंट बजा देते।     75/80 सांसद वाली पार्टी लीडर और 337/403 विधायक वाले यूपी के CM कह रहे हैं "गंदगी से हुई हैं मौतें।" इसका मतलब 4 साल से "स्वच्छ भारत अभियान" विदेश में चल रहा था ??? अब तो पता चल गया न, जिंदगी मंदिर-मस्जिद से नहीं, ऑक्सीजन से चलती है...!

कर्मचारी, नेता दोनों 50 साल में हों रिटायर

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कर्मचारी, नेता दोनों 50 साल में हों रिटायर उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि कि 50 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों की कार्य कुशलता की समीक्षा की जाएगी। उसके आधार पर सरकार की तरफ से उन्हें रिटायर कर दिया जाएगा। एक तरह से सरकार की यह सोच सही है कि जो कर्मचारी काम करने अयोग्य हो तो उसको सरकार की तरफ से ही रिटायर कर दिया जाए। इसकाएक बड़ा फायदा यह होगा कि सरकार को बेवजह कर्मचारी को ढोना नहीं पड़ेगा। दूसरे, यह कि शिक्षित युवा बेरोजगारों को सेवा का मौका मिलेगा। बेशक दूरदर्शी सरकार की यह बेहतरीन सोच है।       कर्मचारियों की ही तरह यह बात नेताओं पर भी लागू होनी चाहिए। कर्मचारी विभाग का एक पटल संभालते हैं, जबकि हमारे वोट से चुने गए नेता पूरा प्रदेश और देश चलाते हैं। कर्मचारियों से ज्यादा जिम्मेदारी नेताओं के कंधों पर रहती है। इसलिए जनता को भी चाहिए कि ग्राम पंचायत/वार्ड से लेकर एम.पी. तक ऐसे किसी नेता को वोट न दें जिसकी उम्र 50 साल से ज्यादा हो। आखिर यह कौन सा मानक है कि 50 साल का कर्मचारी बूढ़ा और 50 साल का नेता जवान होगा? नेताओं को भी 50 की उम्र में रिटायर क...

गौण होने लगे विकास के मुद्दे

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गौण होने लगे विकास के मुद्दे इस समय देश की राजनीति किधर जा रही है, कुछ कहा नहीं जा सकता। विकास की तो शायद ही किसी को फिक्र हो। न कोई विचार है, न चिंतन। सियासत करने वालों पर तो सिर्फ सत्ता की भूख हावी है। सच कहा जाए तो धर्म ही एक ऐसा मुद्दा है, जिसके सहारे सत्ता सुख के चरम तक पहुंचा जा सकता है। बस, तरीका आना चाहिए उसको भुनाने का। विकास के इतर चर्चित विषय हैं, जिनका देश के विकास में जरा सा भी योगदान नहीं है। जैसे-राम मंदिर, लव जिहाद, घर वापसी, गौ रक्षा-गौ मांस, सहिष्णुता, असहिष्णुता, शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान, कन्हैया, भारत माता की जय, वंदे मातरम्, कश्मीर सर्जिकल स्ट्राइक, तलाक व पर्सनल लॉ कानून, 500, 1000 के नोट बंद होना, अजान... आदि। इन नए मुद्दों ने पूरे तीन साल मीडिया को व्यस्त रखा। वहीं आम आदमी की बुनियादी जरूरतों से जुड़े सवालों को सिरे से ही गायब कर दिया। काबिले गौर यह भी है... क्या इन तीन सालों में कभी आपने टीवी पर सरकारी शिक्षा के गिरते स्तर पर बहस देखी? ग्रामीण भारत में आज भी जारी बाल विवाह की समस्या पर एक्सपर्ट्स की कोई टीम टीवी पर देखी? सड़को पर भीख मांगत...

बूचड़खानों के खिलाफ मुहिम, समझ से परे

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बूचड़खानों के खिलाफ मुहिम, समझ से परे बूचड़खानों के खिलाफ मुहिम का मामला आम इंसान की समझ से परे नजर आता है। हर कोई यह जानने को बेताब है कि यह मुहिम पशुवध के खिलाफ है या वर्ग विशेष और छोटे-मोटे कारोबारियों को डराने-धमकाने के लिए ? अगर पशुवध गलत है तो फिर कुछ खास कारोबारियों को हजारों की पशु काटने का लाइसेंस क्यों ? वजह साफ है सुगबुगाहट के अनुसार ये लोग आपको चुनौती देने की तैयारी में हैं। आल इंडिया मीट एंड लाइवस्टाक एक्सपोर्टर्स का कहना है कि इस ज्यादती खिलाफ वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।      वैसे भी सत्तारूढ़ भाजपा ने उत्तर प्रदेश में सभी मशीनी बूचड़खाने बंद करने का वादा किया था। इस वादे पर अमल करने में सरकार को केंद्र में अपनी ही पार्टी की नीतियों के खिलाफ कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में सूबे के सभी मशीनी बूचड़खानों को बंद करने का वादा किया था। इसे अमली जामा पहनाने की दिशा में योगी सरकार का कहना है कि यू.पी. में चल रहे अवैध बूचड़खानों को बंद कराना और मशीनी पशु वधशालाओं पर प्रतिबंध उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।  ...

रोमियो-वोमियो तो खेल है

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रोमियो-वोमियो तो खेल है...   यूपी सरकार ने आज ही शासनादेश जारी किया है जिसमें अंतरधार्मिक और अंतर्जातीय विवाह करने वालों को प्रोत्साहन राशि जारी की गई है। ऐसा करने पर 50 हजार रुपये मिलेंगे। जाहिर है ऐसे विवाह घर वाले तो करते नहीं, आमतौर पर प्रेम विवाह ही होते हैं। मतलब जाति-धर्म का बंधन तोड़कर विवाह। वैसे ये प्रोत्साहन बरसों से दिया जा रहा है, कानूनन है, फिर भी न जाने क्यों इस प्रकार के विवाह समाज में सामान्य बात बने, ऐसा राजनीति और सामाजिक ढांचा नहीं चाहता। लव जेहाद या ऐसे ही कई शब्द गढ़कर ऑनर किलिंग जैसे अपराध को बढ़ावा दिया जाता है। आज एक शासनादेश और जारी हुआ है, योगी सरकार लैपटॉप वितरण योजना को पूरी तरह ठप नहीं कर रही। जिनको नहीं मिला, उन्हें उतने पैसे मिलेंगे, वह भी इस वित्तीय वर्ष के खत्म होने से पहले।